Bastar Mobile Network: आदिवासी ढोल–नृत्य करते पहुंचे मोबाइल टावर के नीचे
Bastar Mobile Network
नई दिल्ली, 05 दिसम्बर 2025/
बस्तर के जिन इलाकों में कभी नक्सलवाद के कारण भय और अलगाव का माहौल था, वहाँ अब बदलते दौर की स्पष्ट झलक दिखाई देने लगी है। बीजापुर के दूरस्थ ग्राम कोंडापल्ली में पहली बार मोबाइल नेटवर्क पहुँचने के साथ ही न सिर्फ तकनीकी सुविधा आई, बल्कि लोगों के मन में यह विश्वास भी जागा कि नक्सलवाद की समाप्ति अब ज़मीन पर दिखने लगी है। जैसे ही ग्रामीणों के मोबाइल फोन में सिग्नल दिखाई दिया, आदिवासी परिवार बड़ी संख्या में टॉवर के पास पहुँचे। उन्होंने ढोल–माँदर बजाए, कुछ बुज़ुर्गों ने मोबाइल टॉवर को हाथ लगाकर प्रणाम किया और कई महिलाओं ने दीपक जलाकर पूजा-अर्चना की। यह दृश्य उस बदलाव का प्रतीक बन गया जिसकी प्रतीक्षा वर्षों से थी।
कोंडापल्ली तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित एक घना वनांचल है, जहाँ वर्षों से सड़क, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं। ऐसे में गाँव में मोबाइल टॉवर स्थापित होना स्थानीय समुदाय के लिए केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि दुनिया से जुड़ने का प्रतीक बन गया।
कोंडापल्ली लंबे समय से संचार, सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहा है। प्रशासनिक पहुँच की कठिनाइयों और नक्सली अवरोधों के बीच यहाँ तकनीकी ढाँचा विकसित करना बड़ी चुनौती था। लेकिन लगातार अभियान, सुरक्षा सुधार और सरकारी पहलों के कारण अब यह इलाका तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता को ग्रामीणों ने सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि नई ज़िंदगी की शुरुआत माना।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू की गई नियद नेल्ला नार योजना ने इस परिवर्तन में अहम भूमिका निभाई है। योजना के तहत 69 नए कैम्पों के आसपास 403 गाँवों में सेवाएँ पहुँचाई जा रही हैं। 9 विभागों की सामुदायिक सेवाएँ और 11 विभागों की व्यक्तिमूलक योजनाओं को नियमित रूप से हर परिवार तक पहुँचाया जा रहा है। बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन, संचार और पेयजल जैसी सुविधाएँ अब पूर्व की तुलना में ज़्यादा सुगमता से उपलब्ध हो रही हैं।
संचार क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। कुल 728 नए टॉवर स्थापित किए गए हैं, जिनमें 116 टॉवर LWE क्षेत्रों में और 115 आकांक्षी जिलों में लगाए गए। 467 टॉवर 4G सेवा के साथ चालू हुए हैं, जबकि 449 पुराने टॉवरों को 2G से 4G में अपग्रेड किया गया है। जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में पहली बार नेटवर्क पहुँचने से सैकड़ों परिवार डिजिटल दुनिया से जुड़े हैं।
कोंडापल्ली में प्रशासनिक कैम्प शुरू होने के बाद अधिकारियों की नियमित पहुँच सुनिश्चित हुई है। BRO द्वारा लगभग 50 किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। दो महीने पहले पहली बार बिजली पहुँचने से बच्चों की पढ़ाई आसान हुई, नए छोटे व्यवसाय शुरू हुए, और रातें पहले से कहीं अधिक सुरक्षित महसूस होने लगीं। लगातार लगाए जा रहे सेचुरेशन शिविरों में ग्रामीणों को योजनाओं का सीधा लाभ दिया जा रहा है।
मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होने के बाद आधार प्रमाणीकरण, बैंकिंग सेवाएँ, पेंशन, राशन संबंधी प्रक्रियाएँ, ऑनलाइन शिक्षा और टेली-मेडिसिन जैसी सेवाएँ अब सरल होंगी। जो लोग पहले इन सुविधाओं तक पहुँचने के लिए कई किलोमीटर जंगल पार करते थे, अब घर बैठे ही इनका लाभ ले सकेंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि को बस्तर के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि कोंडापल्ली में नेटवर्क का पहुँचना केवल संचार सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि उन सपनों के पुनर्जीवन का संकेत है जो वर्षों से उपेक्षित रहे। उनका कहना है कि राज्य सरकार का लक्ष्य बस्तर के हर गाँव को डिजिटल सेवाओं और सरकारी योजनाओं की पूर्ण पहुँच दिलाना है और यह बदलाव आने वाले समय में और भी व्यापक होगा।
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