Uttarakhand UCC: उत्तराखण्ड : विवाह पंजीकरण में 24 गुना वृद्धि
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दूसरे राज्यों के लिए पेश की मिसाल
Uttarakhand UCC
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना है। इस कानून के अस्तित्व में आने के बाद आम लोगों में विवाह पंजीकरण को लेकर जागरूकता बढ़ी है। आंकड़ों पर नजर डौदाएं तो पुराने एक्ट के मुकाबले में विवाह पंजीकरण कराने वालों की प्रतिदिन की औसत संख्या में 24 गुना वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का संकल्प लिया था और पार्टी के सत्ता में आने पर उन्होंने यह संकल्प पूरा किया। मुख्यमंत्री धामी ने पहली कैबिनेट बैठक में ही राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने का फैसला किया। सभी औपचारिकताएं और जनमत संग्रह करने के बाद प्रदेश में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी कानून लागू कर दिया गया।
मुख्यमंत्री का यह ऐतिहासिक फैसला सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समान अधिकारों की दिशा में उठाया गया साहसिक कदम है। यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप है और इसका उद्देश्य हर वर्ग या समुदाय के सभी नागरिकों खास तौर से महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान प्रदान करना है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव इन रिलेशनशिप और इनसे जुड़े मुद्दों को यूसीसी में शामिल किया गया है। इस कानून में जहां महिला एवं पुरुषों के लिए विवाह की उम्र निर्धारित कर दी गई है, वहीं सभी धर्मों में तलाक और दूसरी प्रक्रिया के लिए भी कड़े प्रावधान किए गए हैं। इस कानून के लागू होने से महिलाओं को बहुविवाह और हलाला जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है।
यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में विवाह पंजीकरण में खासी तेजी आई है। आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी लागू होने बाद जुलाई 25 तक यानी छह माह की अवधि में विवाह पंजीकरण की संख्या तीन लाख से अधिक पहुंच गई है, जबकि वर्ष 2010 में लागू पुराने एक्ट के तहत 26 जनवरी 2025 तक कुल 03 लाख 30 हजार 064 विवाह पंजीकरण हुए थे। प्रतिदिन का औसत देखा जाए तो पुराने एक्ट के अनुसार प्रतिदिन विवाह पंजीकरण की औसत संख्या मात्र 67 थी, जो यूसीसी लागू होने बाद 1634 पहुंच गई है।
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