BJP Government In West Bengal: मुकुल से सुवेंदु तक: बंगाल में भाजपा के उदय की दो बड़ी राजनीतिक कहानियां
BJP Government In West Bengal
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले एक दशक के दौरान जिस तेजी से बदलाव आया, उसकी पटकथा लिखने वाले चेहरों में सबसे प्रमुख नाम मुकुल राय और सुवेंदु अधिकारी का माना जाता है। दोनों कभी तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार रहे, लेकिन समय के साथ यही नेता भाजपा के लिए बंगाल में सबसे बड़े राजनीतिक हथियार बन गए। एक ने भाजपा की बुनियाद तैयार की, तो दूसरे ने उसे सत्ता के शिखर तक पहुंचा दिया।
नवंबर 2017 में दिल्ली में आयोजित एक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम में मुकुल राय ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। उस समय मंच पर भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद और कैलाश विजयवर्गीय मौजूद थे। भाजपा में शामिल होते हुए मुकुल राय ने कहा था कि भाजपा साम्प्रदायिक नहीं बल्कि धर्मनिरपेक्ष पार्टी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में काम करना उनके लिए सौभाग्य की बात होगी।
उस दौरान रविशंकर प्रसाद ने मुकुल राय को तृणमूल कांग्रेस का संस्थापक सदस्य बताते हुए कहा था कि उन्होंने बंगाल में वाममोर्चा के 30 वर्षों के शासन के खिलाफ संघर्ष में अहम भूमिका निभाई थी। प्रसाद ने कहा था कि मुकुल राय का राजनीतिक अनुभव भाजपा के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। भाजपा नेतृत्व की यह उम्मीद आगे चलकर सही भी साबित हुई।
तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के बाद मुकुल राय ने भाजपा के संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का अभियान शुरू किया। जिस प्रकार उन्होंने कभी ममता बनर्जी के साथ मिलकर वाममोर्चा सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए संगठन खड़ा किया था, ठीक उसी तरह उन्होंने भाजपा को गांव-गांव तक पहुंचाने की रणनीति बनाई।
2019 के लोकसभा चुनाव में मुकुल राय और कैलाश विजयवर्गीय की जोड़ी ने बंगाल में भाजपा के लिए आक्रामक चुनावी रणनीति तैयार की। इसका असर चुनावी नतीजों में साफ दिखाई दिया। 2014 में जहां भाजपा को बंगाल में केवल 2 लोकसभा सीटें मिली थीं, वहीं 2019 में पार्टी ने 42 में से 18 सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा का वोट शेयर भी 17.2 प्रतिशत से बढ़कर 40.25 प्रतिशत तक पहुंच गया। राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे बंगाल की राजनीति में भाजपा के सबसे बड़े उभार के रूप में देखा।
हालांकि 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता तक नहीं पहुंच सकी। चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 215 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि भाजपा को 77 सीटें मिलीं। इसके बावजूद भाजपा का वोट शेयर 38 प्रतिशत से अधिक रहा, जिसने यह साफ कर दिया कि बंगाल अब एकदलीय राजनीति से आगे बढ़ चुका है।
इसी बीच 11 जून 2021 को मुकुल राय ने भाजपा छोड़कर फिर से तृणमूल कांग्रेस में वापसी कर ली। उस समय उनकी शारीरिक स्थिति भी लगातार खराब हो रही थी और धीरे-धीरे वे सक्रिय राजनीति से दूर होते चले गए। इस बिच 23 फरवरी 2026 को 71 वर्ष की उम्र मे उनका निधन हो गया, लेकिन भाजपा में उनके द्वारा तैयार की गई राजनीतिक जमीन पर आगे बढ़ने का जिम्मा संभाला सुवेंदु अधिकारी ने।
सुवेंदु अधिकारी का भाजपा में प्रवेश 19 दिसंबर 2020 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुआ था। सुवेंदु भी तृणमूल कांग्रेस के शुरुआती दौर से जुड़े रहे थे और ममता बनर्जी के सबसे करीबी नेताओं में गिने जाते थे। छात्र राजनीति से ही उनकी संगठनात्मक पकड़ मजबूत रही और पूर्वी मेदिनीपुर से लेकर पूरे दक्षिण बंगाल तक उनका व्यापक प्रभाव था।
भाजपा में शामिल होने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल की राजनीति में खुद को सबसे आक्रामक विपक्षी चेहरे के रूप में स्थापित किया। 2021 विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीधी चुनौती दी और उन्हें हराकर राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संदेश दिया। इस जीत के बाद भाजपा के भीतर उनका कद तेजी से बढ़ा और वे अमित शाह, नरेंद्र मोदी सहित पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सबसे भरोसेमंद नेताओं में शामिल हो गए।
2026 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी भाजपा के सबसे बड़े रणनीतिक चेहरों के रूप में उभरे। अमित शाह, भाजपा के केंद्रीय और राज्य नेतृत्व के साथ मिलकर उन्होंने चुनावी रणनीति तैयार की। भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को खुली चुनौती देते हुए सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें 15 हजार से अधिक वोटों से पराजित कर दिया।
इस चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटों पर जीत दर्ज की। बंगाल की राजनीति में यह पहली बार हुआ जब भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में पहुंची। चुनावी नतीजों के बाद सुवेंदु अधिकारी को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया और उन्हें पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में घोषित किया गया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में भाजपा के उदय की कहानी मुकुल राय और सुवेंदु अधिकारी के बिना अधूरी है। मुकुल राय ने जहां भाजपा के लिए संगठनात्मक आधार तैयार किया, वहीं सुवेंदु अधिकारी ने उस आधार को जनसमर्थन में बदलते हुए सत्ता तक पहुंचा दिया। बंगाल की राजनीति में यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत माना जा रहा है।
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