दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज में मुख्यमंत्री ने किया डॉ. तेज प्रताप शाही की स्मृति में आधुनिक कंप्यूटर प्रयोगशाला का उद्घाटन
इमर्जिंग टेक्नोलॉजी में मददगार होगी कंप्यूटर लैब: सीएम योगी
Bachcha Babu
गोरखपुर, 6 अप्रैल। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज में आधुनिक प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। यह प्रयोगशाला पीजी कॉलेज के पूर्व शिक्षक डॉ. तेज प्रताप शाही की स्मृति में उनके परिवार की तरफ से बनवाई गई है। उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कंप्यूटर लैब इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, शोध-अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने में विद्यार्थियों के लिए काफी मददगार साबित होगी।
कार्यकम में मुख्यमंत्री ने ‘बच्चा बाबू’ के नाम से चर्चित रहे डॉ. तेज प्रताप शाही की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के लिए कंप्यूटर लैब के जरिये उनके परिवार की पहल को सराहा। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज में लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रोफेसर एवं महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के वरिष्ठ सदस्य डॉ. शाही की स्मृतियों को नमन करने के लिए आयोजित किया गया है। उनके पुत्रों द्वारा महाविद्यालय में स्थापित यह अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस कार्य के लिए सीएम ने स्वर्गीय शाही के पुत्रों अनन्य प्रताप शाही और अतिरेक शाही को हृदय से साधुवाद दिया और डॉ. शाही की स्मृतियों को नमन करते हुए अपनी विनम्र श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
बच्चा बाबू की अगाध निष्ठा को यादकर भावुक हुए सीएम योगी
कार्यक्रम के दौरान बच्चा बाबू की गोरक्षपीठ के प्रति अगाध निष्ठा को याद कर मुख्यमंत्री काफी भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि वास्तव में व्यक्ति क्या है, हम उसके रहते हुए समझने का प्रयास नहीं करते। हम लोगों ने स्वर्गीय हरि प्रसाद शाही को नहीं देखा था, लेकिन उनके पुत्रों को और उनमें डॉ. तेज प्रताप शाही को बहुत नजदीक से कार्य करते हुए देखा है। कैसे समन्वय किया जा सकता है, कैसे संबंधों को बनाए रखा जा सकता है, यह बच्चा बाबू से सीखा जा सकता है। डॉ. शाही गोरखपुर कांग्रेस के अध्यक्ष थे। केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। एक समय राज्य व केंद्र, दोनों जगह कांग्रेस सरकार थी। पर, कांग्रेस के साथ रहते हुए भी डॉ. शाही गोरक्षपीठ के अनन्य भक्त थे। गोरक्षपीठ के मूल्यों और आदर्शों के प्रति उनकी अटूट निष्ठा थी। वह पूज्य महाराज ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी के साथ सदैव खड़े रहने वाले लोगों में थे। विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी वह साथ रहे।
रुंधे गले से साझा किया संस्मरण सीएम ने
डॉ. शाही का एक संस्मरण साझा करते हुए सीएम योगी का गला रुंध गया। अश्रुपूरित नेत्रों के साथ उन्होंने कहा, “मुझे याद है, जुलाई 2020 में एक दिन अचानक डॉ. शाही का फोन आया। समय लेकर वह अपने दोनों पुत्रों को लेकर मिलने आए। मैंने उनसे कहा, बच्चा बाबू इनके साथ आप गोरखपुर में भी मिल सकते थे। इस पर उन्होंने कहा- मुझे कुछ आभास हो रहा था, इसलिए अपने दोनों पुत्रों का आपसे परिचय कराने के लिए लाया हूं। अब आप इनके अभिभावक के रूप में हैं।” मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं भौंचक था और लगा कि हो सकता है कि बच्चा बाबू मेरे साथ मजाक कर रहे हैं। पर, ठीक एक सप्ताह के बाद जानकारी मिली कि उनको कोरोना हो गया है। और बाद में जब उन्हें परिजन लखनऊ लेकर गए तो उनका शरीर छूट चुका था। यानी पहले से ही उनको इस चीज का एहसास हो गया था कि मुझे अब अपनी दुनियादारी को समेटना है और उसको देखते हुए स्वयं मेरे पास लखनऊ आए थे।
कार्यक्रम में डॉ. तेज प्रताप शाही के परिजनों अनन्य शाही, अतिरेक शाही, चांदनी शाही ने मुख्यमंत्री का स्वागत एवं अभिनंदन किया। आभार ज्ञापन दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने किया। इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, नौतनवा के विधायक ऋषि त्रिपाठी, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, पूर्व महापौर अंजू चौधरी, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के सदस्यगण आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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