Bullet Train Project:  मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का अनुभव भारत के भविष्य के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के लिए एक मजबूत नींव

Bullet Train Project:

भारी निर्माण मशीनरी, घरेलू स्लैब ट्रैक घटकों और विशेष ट्रैक मशीनों के स्वदेशीकरण से भारत की घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा

लगभग 1,000 भारतीय इंजीनियरों और कुशल श्रमिकों को जापानी पद्धति में प्रशिक्षित किया गया

एमएएचएसआर को मौजूदा रेल/हवाई यात्रा के साथ प्रतिस्पर्धी किराए के साथ उच्च आवृत्ति संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया

ईडीएफसी और डब्ल्यूडीएफसी पर प्रतिदिन 406 ट्रेनें चल रही हैं, जिससे पारंपरिक रेल नेटवर्क पर अतिरिक्त क्षमता का निर्माण हो रहा है

संसद सत्र के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक प्रश्न के जवाब में क्या कुछ कहा चलिए आपको विस्तार से बताते हैं।

वर्तमान में, मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना (508 किमी) जापान सरकार की तकनीकी और वित्तीय सहायता से क्रियान्वयनाधीन है। एमएएचएसआर परियोजना की योजना बनाई गई है और इसका निर्माण एलिवेटेड पुल पर किया गया है। इन कॉरिडोर पर स्टेशनों के डिजाइन में नियंत्रित प्रवेश द्वार , बैगेज स्कैनर, डीएफएमडी (डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर), सीसीटीवी (क्लोज सर्किट टेलीविजन) कैमरे  आदि जैसे सुरक्षा उपायों का प्रावधान शामिल है।

एमएएचएसआर परियोजना के माध्यम से विकसित किए जा रहे अनुभव और तकनीकी क्षमताएँ, विशेष रूप से ट्रैक निर्माण, उन्नत सिग्नलिंग, रोलिंग स्टॉक विनिर्माण और रखरखाव, परियोजना प्रबंधन आदि के क्षेत्र देश में भविष्य की हाई स्पीड रेल कॉरिडोरों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करने की अपेक्षा है। ऐसी विशेषज्ञता प्राप्त होने से भारत हाई स्पीड रेल त्र में योजना निर्माण और निर्णय लेने की अपनी क्षमता एवं स्थिति को और सुदृढ़ करेगा.

मद

प्रगति

नींव

352 किलोमीटर

खंभे

352 किलोमीटर

गर्डर ढलाई

342 किलोमीटर

गर्डर स्थापना

331 किलोमीटर

ट्रैक बेड निर्माण कार्य

152 किलोमीटर

ओएचई स्तंभ स्थापना

121 किलोमीटर

Maharashtra:

मद

प्रगति

नींव

74 किलोमीटर

खंभे

65 किलोमीटर

गर्डर ढलाई

9 किलोमीटर

गर्डर स्थापना

3 किलोमीटर

कुल 12 स्टेशनों में से 8 स्टेशन (वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, आणंद, वडोदरा, अहमदाबाद और साबरमती) पर नींव का काम पूरा हो चुका है। महाराष्ट्र खंड में, 3 स्टेशनों (ठाणे, विरार, बोईसर) पर नींव का कार्य प्रगति पर है और बीकेसी स्टेशन पर खुदाई का कार्य पूरा होने वाला है और बेस स्लैब की ढलाई का कार्य शुरू हो गया है।

17 नदी पुलों के निर्माण का कार्य सम्पूर्ण गया है। गुजरात में 4 प्रमुख नदी पुलों (नर्मदा, माही, ताप्ती और साबरमती) के लिए कार्य अग्रिम चरण में है और महाराष्ट्र में 4 नदी पुलों में प्रगति पर है। डिपो (ठाणे, सूरत और साबरमती) पर काम जोरों पर है।

बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में सिविल कार्य संतोषजनक ढंग से चल रहे हैं। उत्खनन कार्यों ने लगभग 91% प्रगति हासिल की है, और कंक्रीटिंग कार्य विभिन्न चरणों में हैं, जिसमें लेवल-4 पर बेसमेंट स्लैब का 100% पूरा होना है। समुद्र के नीचे सुरंग (लगभग 21 किमी) का काम शुरू हो गया है, जिसमें से महाराष्ट्र में घनसोली और शिल्पफाटा के बीच 4.8 किमी सुरंग पूरी हो चुकी है।

मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप, भारतीय रेलवे आयात निर्भरता को कम करने के लिए हाई-स्पीड रेल प्रणालियों और घटकों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा दे रहा है। वंदे भारत की सफलता के आधार पर, इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) मैसर्स भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) के सहयोग से 280 किमी प्रति घंटे की डिजाइन गति के साथ हाई-स्पीड ट्रेन सेट का डिजाइन और निर्माण कर रही है।

परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण लागू कानूनों के अनुसार किया गया है और प्रभावित व्यक्तियों को भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम में उचित मुआवजा और पारदशता का अधिकार अधिनियम और संगत राज्य नीतियों के अनुसार मुआवजा दिया गया है। राज्य सरकारों के समन्वय से अतिरिक्त लाभ और सुविधा सहित पुनर्वास और पुनर्स्थापन उपाय किए गए हैं।

एमएएचएसआर कॉरिडोर को पर्याप्त यात्री-वहन क्षमता के साथ उच्च-आवृत्ति संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया है। मौजूदा रेल/हवाई यात्रा विकल्पों के संबंध में टिकट मूल्य निर्धारण को प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रस्ताव है। परियोजना की व्यवहार्यता का आकलन दीर्घकालिक आधार पर किया गया है, जिसमें अनुमानित यात्री मांग, आर्थिक लाभ, समय की बचत और क्षेत्रीय विकास को ध्यान में रखा गया है।

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना (508 किमी) जापान सरकार से तकनीकी और वित्तीय सहायता के साथ निष्पादन के अधीन एकमात्र एचएसआर परियोजना है। 31.12.2025 तक परियोजना पर 86,939/- करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर

रेल मंत्रालय ने 1,24,005 करोड़ रुपये की कुल लागत से दो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) अर्थात लुधियाना से सोननगर (1337 किमी) तक ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (ईडीएफसी) और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (जेएनपीटी) से दादरी (1506 किमी) तक वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) का निर्माण शुरू किया है। ईडीएफसी का काम पूरा हो चुका है और चालू हो चुका है। डब्ल्यूडीएफसी में कुल 1506 मार्ग किलोमीटर में से 1404 मार्ग किलोमीटर पूरा हो चुका है और इसे चालू कर दिया गया है। वैतरणा-जेएनपीटी खंड (102 किमी किमी) से डब्ल्यूडीएफसी पर शेष कार्य शुरू कर दिया गया है।

डीएफसी ने माल ढुलाई को ईडीएफसी और डब्ल्यूडीएफसी की ओर मोड़कर पारंपरिक नेटवर्क पर अतिरिक्त मार्ग बनाने में योगदान दिया है। वर्तमान में, इन कॉरिडोर पर प्रति दिन औसतन 406 ट्रेनें चलाई जा रही हैं।

केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री  अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी आज लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में दी।

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