Justice Suryakant Statement: सोमवार को देश के 53 वें CJI के रूप में शपथ लेने जा रहे जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और पूरे देश में मुकदमों का बढ़ता बोझ घटाने के लिए समानांतर योजनाएं लागू करेंगे।
Justice Suryakant Statement
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमारी प्राथमिकता अदालतों मे लंबित मामलों की संख्या कम करने की होगी।
सुप्रीम कोर्ट मे लंबित मामलो और देशभर की अदालतों मे लंबित मामलो को कैसे कम करना है उसपर काम किया जाएगा।
उन्होंने कहा है कि चीफ जस्टिस का शपथ लेने के तत्काल बाद वो देशभर के सभी हाईकोर्ट से बात कर ऐसे मामलो की पहचान कर उनका निपटारा किया जाएगा जिसकी वजह से निचली अदालतों मे मामलों की सुनवाई नही हो पा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार सबसे बडी पक्षकार (वादी) है इस मसले पर भी काम किया जाएगा कि कैसे इसे कम किया जाए।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अगले कुछ हफ्तों में पांच, सात और नौ जजों की संविधान पीठ गठित कर लंबे समय से लंबित महत्वपूर्ण मुकदमों की सुनवाई कराने पर कदम उठाए जाएंगे।
मिडिएशन को भी कारगर ढंग से लागू किया जाएगा ताकि लाखों मुकदमों का बोझ घटाया जा सके।
राज्य सरकारों, केंद्र और राज्य के बीच मुकदमेबाजी के बोझ कम करने के लिए मिडिएशन को बढ़ावा दिया जा सकता है..कम्युनिटी मिडिएशन पर फोकस हो..इसके लिए अनुकूल माहौल तैयार करना होगा।
AI के इस्तेमाल पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कई मुद्दे और चुनौतियां हैं। इसके फायदे भी हैं लेकिन लोगों के मन में कुछ डर भी हैं। प्रोसीडरल मामलों में इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन हर कोई चाहता है कि उसके मुकदमे का फैसला जज के जरिए होना चाहिए।
अक्सर फैसलों को लेकर सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग के सवाल पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि समस्या होगी तो इसका समाधान भी होगा।देश के चीफ जस्टिस या किसी भी कोर्ट के जज को किसी भी तरह के आलोचनाओं का दबाव नहीं लेना चाहिए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक और बेंच खोले जाने के सवाल टर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जाहिर तौर पर ये एक मुद्दा है। लेकिन किसी भी हाईकोर्ट की स्थापना को लेकर कुछ भावनाएं जुड़ी होती है। लखनऊ बेंच में काफी अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर है..लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट में आधुनिक सुविधाओं का अभाव है। जजों की संख्या पूरी नहीं हो पा रही है। पार्किंग की समस्या है। उत्तर प्रदेश बहुत बड़ा राज्य है। जाहिर तौर पर लोगों को त्वरित न्याय मिलना चाहिए। हालांकि किसी भी हाईकोर्ट की नई बेंच के गठन के लिए संसद, पेरेंट हाईकोर्ट सहित सभी को फैसला लेना होता है।
शपथ ग्रहण से पहले कोर्ट रिपोर्टर से मुकालात के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने चीफ जस्टिस के तौर पर अपनी प्राथमिकयाऐं बताई।
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