Kashi Tamil Sangamm: वर्तमान में भारत सरकार भाषाई पुनर्जागरण , संस्कृति संरक्षण और राष्ट्रीय एकता को लेकर काम कर रही है भारत सरकार की उपलब्धियों को बताने के लिए केन्द्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने प्रेस कांफ्रेस किया है । इस मौके पर बीएल वर्मा ने कहा कि कि मैं आप सबके सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में हो रहे भाषाई पुनर्जागरण, संस्कृति संरक्षण, और राष्ट्रीय एकता को लेकर कुछ महत्वपूर्ण तथ्य साझा करना चाहता हूँ।
Kashi Tamil Sangamm
1️⃣ मोदी युग में भाषाई पुनर्जागरण
पहले भाषाओं का महत्त्व सिर्फ़ राजनीतिक बहस का विषय बनकर रह जाता था— लेकिन मोदी जी के नेतृत्व में भाषा भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक बनी है।
आज भारतीय भाषाओं को नई पहचान, नई ऊर्जा और वैश्विक प्रतिष्ठा मिल रही है। मोदी जी का स्पष्ट मंत्र है—“भारत की भाषाएँ भारत की शक्ति हैं, भारत की विविधता भारत की ताकत है।”
2️⃣ भाषायी विविधता = भारत की एकता
प्रधानमंत्री मोदी जी हमेशा कहते हैं कि भारत की विविध भाषाएँ हमें जोड़ती हैं, अलग नहीं करतीं।
पहले भाषाई मतभेद पैदा किए जाते थे, अब भाषाई विविधता राष्ट्रीय एकता की शक्ति बनी है।
यही दृष्टिकोण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में दिखाई देता है, जहाँ सभी भारतीय भाषाओं को समान महत्व दिया गया है—
◾ मातृभाषा में शिक्षा
◾ सभी भाषाओं का संरक्षण
◾ भाषाओं को ज्ञान और रोजगार से जोड़ने का प्रयास
यह परिवर्तन भारत के भविष्य को मजबूत करेगा।
3️⃣ शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव – मातृभाषा को सम्मान
मोदी सरकार ने स्पष्ट रूप से माना है कि
बच्चों की पूर्ण क्षमता तभी खुलती है जब वे मातृभाषा में सीखते हैं।
पहले शिक्षा अंग्रेज़ी तक सीमित थी, अब—
◾ कक्षा 5 (और जहाँ सम्भव हो 8) तक मातृभाषा/स्थानीय भाषा में शिक्षा
◾ इंजीनियरिंग, मेडिकल, तकनीकी विषयों की पढ़ाई भी भारतीय भाषाओं में
◾ प्रत्येक भाषा के लिए वैज्ञानिक शब्दावली विकसित यह कदम भारत की प्रतिभा को नई ऊँचाई देगा।
4️⃣ 11 भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा – ऐतिहासिक निर्णय
अमित शाह जी ने स्वयं कहा है कि भारतीय भाषाएँ हमारी पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं।
मोदी सरकार ने 2024 में एक ऐतिहासिक फैसला लिया—
◾मराठी
◾पाली
◾प्राकृत
◾असमिया
◾बंगाली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया।
इसके साथ भारत में शास्त्रीय भाषाओं की संख्या 6 से बढ़कर 11 हो गई। यह निर्णय केवल सम्मान नहीं— यह हमारी सभ्यता, दर्शन और ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का बड़ा कदम है।
5️⃣ काशी–तमिल संगमम्: उत्तर–दक्षिण का सांस्कृतिक संगम
मोदी जी के विज़न “एक भारत — श्रेष्ठ भारत” को धरातल पर उतारने वाली सबसे महत्वपूर्ण पहल है— काशी–तमिल संगमम्।
यह आयोजन सिर्फ़ सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को जोड़ने वाला महापर्व है।
2025 के संगमम् 4.0 में—1,400 से अधिक प्रतिनिधि तमिलनाडु से काशी पहुंचे।
▪ “चलो तमिल सीखें — तमिल करकलम” जैसे कार्यक्रम भाषायी सम्मान को बढ़ा रहे हैं।
यह पहली बार है जब भारतीय भाषाओं के बीच राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा सेतु बनाया गया है।
6️⃣ डिजिटल इंडिया में भाषाएँ भी आगे
मोदी सरकार ने तकनीक को भाषा सशक्तिकरण का आधार बनाया है—
◾ भाषिणी, भारतजेन — 22 अनुसूचित भाषाओं में रीयल-टाइम ट्रांसलेशन
◾ आदि-वाणी प्लेटफ़ॉर्म — आदिवासी भाषाओं का डिजिटलीकरण
◾ CSTT द्वारा हर भाषा में तकनीकी शब्दावली
आज डिजिटल भारत में भाषाई अवरोध समाप्त हो रहे हैं।
7️⃣ हिंदी की वैश्विक प्रतिष्ठा — पीएम मोदी का नेतृत्व
प्रधानमंत्री मोदी जी ने वैश्विक मंचों पर भरोसे और गर्व से हिंदी का प्रयोग किया। इससे दुनिया में भारत की भाषाई पहचान मजबूत हुई है।
सीमित दायरे वाली हिंदी आज— राजनीति, कूटनीति और वैश्विक संवाद की प्रमुख भाषा बन रही है।
8️⃣ शोध, शिक्षा और भाषा संस्थानों का विस्तार
सरकार ने—
◾तीन केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय
◾विभिन्न भाषाओं के उत्कृष्टता केंद्र
◾CIIL के माध्यम से भाषा-संपदा का डिजिटल भंडार
◾लुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण हेतु SPPEL
को अभूतपूर्व समर्थन दिया है।
पिछले पाँच वर्षों में बजट भी कई गुना बढ़ाया गया है, जिससे भाषा शोध और विकास को नई गति मिली है।
आज भारत का भाषाई परिदृश्य बदल चुका है।
मोदी जी के नेतृत्व में भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं,
राष्ट्र निर्माण का आधार बनी है।
हम सबका संकल्प स्पष्ट है—“हर भाषा का सम्मान – एक भारत, श्रेष्ठ भारत।”
इसे भी पढे़:- Uttarakhand Local to Global: मुख्यमंत्री धामी बोले—औपचारिक भेंटों में स्थानीय उत्पादों को दें प्राथमिकता
Reported By Mamta Chaturvedi

