Mandir Cluster Model: बागपत जिला प्रशासन ने पुरा महादेव मंदिर में आयोजित किया जीरो वेस्ट महोत्सव, पेश किया मंदिर कल्स्टर मॉडल, पूजा सामग्री व अन्य अपशिष्ट का वैज्ञानिक विधि से किया गया प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण के साथ हुआ रोजगार सृजन
Mandir Cluster Model
लखनऊ, 27 मार्च। बागपत जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप मंदिर क्लस्टर मॉडल’ पेश किया है। जिसके तहत जिले के प्रसिद्ध पुरा महादेव मंदिर को प्रसंस्करण केंद्र बना कर, आसपास के मंदिरों में चढ़ाई गई पूजा सामग्री और अन्य अपशिष्ट पदार्थों का सामुदायिक और वैज्ञानिक तरीके से रिसाइकिल कर बायो डिग्रीडेबल सामानों में बदला गया है। इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिला है, बल्कि स्थानीय महिलाओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हुए। इस क्रम में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में महाशिवरात्रि के अवसर पर ‘जीरो वेस्ट महोत्सव’ का आयोजन किया गया। जो पुरा महादेव मंदिर के मंदिर क्लस्टर मॉडल का सफल प्रयोग साबित हुआ है। वर्तमान में बागपत का ये मॉडल आज पूरे देश में आस्था के साथ अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
बागपत की जिलाधिकारी, अस्मिता लाल की पहल पर शुरू किए गए पुरा महादेव में अपनाए गए मंदिर क्लस्टर मॉडल में पूजा सामग्री को ‘अपशिष्ट’ नहीं बल्कि ‘संसाधन’ के रूप में देखा गया। अभिषेक में चढ़ाए गए लगभग 47 क्विंटल दूध को नष्ट होने से बचाकर गोशालाओं और पशु सेवा नेटवर्क तक पहुंचाया गया। वहीं, 450 किलोग्राम से अधिक पुष्प सामग्री को वैज्ञानिक तरीके से सुखाकर 43.5 किलोग्राम उपयोगी सूखी सामग्री में बदला गया, जिसका उपयोग अगरबत्ती और हर्बल उत्पादों के निर्माण में किया गया। मंदिर से निकलने वाले लगभग एक टन जैविक कचरे को कम्पोस्ट खाद में बदल कर खेतों में उपयोग किया गया। वहीं प्रकृति की शत्रु के रूप में जानी जाने वाली प्लास्टिक की 700 किलोग्राम से अधिक बोतलों को फाइबर फिल में बदलकर कुशन, गद्दे और ‘नन्ही कली’ गुड़ियों के निर्माण में इस्तेमाल किया गया। वहीं, 2500 से अधिक त्यागी गई चप्पलों को रिसाइकिल कर बैठने के मैट, पावदान व अन्य दैनिक उपयोग के समान बनाए गये।
बागपत के मंदिर क्लस्टर मॉडल की खास बात यह है कि समुदायिक प्रबंधन प्रणाली का उपयोग कर इस कार्य में स्थानीय महिलाओं और स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर रोजगार के अवसरों का सृजन किया गया। महिलाओं ने पुष्प प्रसंस्करण और अन्य सामग्रियों के निर्माण कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही, जेल में बंद कैदियों द्वारा बनाए गए कपड़े के थैलों का उपयोग कर प्लास्टिक के उपयोग को भी कम किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं को भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया और उन्होंने स्वेच्छा से इस अभियान में सहयोग किया। परिणामस्वरूप, मंदिर परिसर में उत्सव के दौरान साफ-सफाई और अनुशासन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह पहल बेहद प्रभावी साबित हुई। इस अभियान से लगभग 1.45 टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन में कमी आई। जो दर्शाता है कि धार्मिक आयोजनों में छोटे-छोटे बदलाव भी बड़े पर्यावरणीय लाभ दे सकते हैं। बागपत जिला प्रशासन का मानना है कि पुरा महादेव मॉडल को अन्य धार्मिक स्थलों पर भी लागू किया जा रहा है। बागपत के पुरा महादेव मंदिर का मंदिर क्लस्टर मॉडल आस्था के साथ अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण के अनूठे संगम के रूप में देशभर के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।
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