NFPRC Workshop: डॉ. नागेश्वरन ने केंद्र-राज्य समन्वय और संस्थागत संरेखण को विकास के महत्वपूर्ण प्रेरकों के रूप में रेखांकित किया; वर्कशॉप में प्रमुख कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के परिवर्तनकारी प्रभाव को प्रस्तुत किया गया
तरुण चुग: शोध से संसद और संसद से ज़मीन तक—यही विकसित भारत की निर्णायक कड़ी है
NFPRC Workshop
नई दिल्ली, 22 जनवरी 2026:
नेशन फर्स्ट पॉलिसी रिसर्च सेंटर (NFPRC) ने “Accelerating India’s Growth: How Parliamentarians and Legislators Can Enable Viksit Bharat @2047” विषय पर सांसदों एवं विधायकों के लिए एक दिवसीय नीति-विमर्श वर्कशॉप का सफल आयोजन गुलमोहर हॉल, इंडिया हैबिटैट सेंटर, नई दिल्ली में किया। इस वर्कशॉप का उद्देश्य भारत के तेज़ और समावेशी विकास के लिए विधायी नेतृत्व की भूमिका, संस्थागत समन्वय और प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों के ज़मीनी क्रियान्वयन पर गंभीर संवाद को प्रोत्साहित करना था।
पूरे दिन चले इस कार्यक्रम में सांसदों, विधायकों और नीति विशेषज्ञों ने भारत की समष्टि आर्थिक रूपरेखा के साथ-साथ केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं के अंतिम स्तर पर प्रभाव और उनके क्रियान्वयन की व्यावहारिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। वर्कशॉप में यह रेखांकित किया गया कि नीति की सफलता केवल उसके उद्देश्यों से नहीं, बल्कि उसके ज़मीनी निष्पादन और संस्थागत समर्थन से तय होती है।

मुख्य भाषण देते हुए भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि 10 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए विधायी संस्थाओं की सक्रिय भूमिका अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, नीतिगत स्थिरता और संस्थागत संरेखण को उच्च-गति विकास के प्रमुख प्रेरक तत्वों के रूप में रेखांकित किया।
कार्यक्रम में आयोजित तकनीकी सत्रों के दौरान सेंटर फॉर एनालिटिकल फाइनेंस, ISB के रिसर्च फेलो राजा बुजनूरी ने पीएम स्वनिधि योजना पर प्रस्तुति दी, जबकि मणी भूषण झा ने जल जीवन मिशन के तहत सेवा वितरण और अंतिम स्तर पर कार्यान्वयन की समीक्षा प्रस्तुत की। इन सत्रों में यह स्पष्ट किया गया कि कैसे विधायी सहभागिता नीति की मंशा को ठोस और मापनीय परिणामों में बदल सकती है। इसके अतिरिक्त, FED के निदेशक राहुल अहलुवालिया ने भारत की आर्थिक ताकतों, चुनौतियों और उभरते अवसरों पर व्यापक आर्थिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर NFPRC फाउंडेशन के अध्यक्ष तरुण चुग और बोर्ड सदस्य डॉ. अभिनव प्रकाश भी उपस्थित रहे। दोनों ने विधायी क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए शोध-आधारित संवाद, संरचित नीति सहभागिता और दीर्घकालिक संस्थागत सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।

तरुण चुग ने कहा कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, कमी उस संस्थागत कड़ी की है जो शोध, विधायन और क्रियान्वयन को एक साथ जोड़ सके। उन्होंने कहा कि NFPRC उसी कड़ी की भूमिका निभाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है—एक ऐसा मंच जो नीति निर्माण की सोच, संसद की भूमिका और ज़मीनी वास्तविकताओं को आपस में जोड़ता है। चुग ने जोड़ा कि अच्छी नीति वही होती है जो स्पष्ट उद्देश्य से जन्म ले, सटीक डेटा और ज़मीनी अनुभव पर आधारित हो तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण को अल्पकालिक राजनीतिक लाभ से ऊपर उठकर दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित पर केंद्रित होना चाहिए। भारत आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहाँ संभावनाएँ अपार हैं, लेकिन संभावनाएँ अपने आप परिणाम में नहीं बदलतीं। विकसित भारत @2047 का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है जब नीति निर्माण सुसंगत, स्थिर और भरोसेमंद होगा और जब तेज़ विकास के लिए केवल योजनाएँ नहीं, बल्कि मज़बूत संस्थागत क्षमता विकसित की जाएगी।

वर्कशॉप के समापन सत्र में इस बात पर बल दिया गया कि सांसदों, विधायकों, नीति विशेषज्ञों और शोध संस्थानों के बीच निरंतर संवाद और सहभागिता से ही विधायी क्षमता, शासन की प्रभावशीलता और भारत की विकास यात्रा को मज़बूती दी जा सकती है। प्रतिभागियों ने साक्ष्य-आधारित और गैर-दलगत संवाद मंचों की आवश्यकता को रेखांकित किया, जो नीति-निर्माताओं को ठोस और विश्वसनीय शोध से जोड़ते हैं। NFPRC ने भविष्य में इस मॉडल को नियमित वर्कशॉप्स, विषयगत संवादों और सतत विधायी सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
NFPRC के बारे में: नेशन फर्स्ट पॉलिसी रिसर्च सेंटर (NFPRC) दिल्ली स्थित एक लोक नीति थिंक टैंक है, जो साक्ष्य-आधारित शोध, विधायी उत्कृष्टता और नीतिगत नवाचार के माध्यम से भारत के शासन तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए कार्य करता है। अपने Centre for Law, Policy and Governance (CLPG) तथा Centre for Accelerating India’s Growth (CAIG) के माध्यम से NFPRC सांसदों एवं विधायकों को शोध सहयोग प्रदान करता है, सरकारी योजनाओं के प्रभाव का आकलन करता है और विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक सुधार ढांचे विकसित करता है।
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