BJP U-Turn: भारतीय जनता पार्टी की सियासत में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है । भारतीय जनता पार्टी में क्या अब वो दौर खत्म हो चला है जब कभी पर्ची से मुख्यमंत्री बना करते थे । अचानक बीजेपी में ये सब क्या हो गया , इस बदलाव की वजह क्या है चलिए विस्तार से बताते है ।
BJP U-Turn
क्या वो दौर अब खत्म हो रहा है जब मुख्यमंत्री का नाम आख़िरी पल में लॉटरी के रिज़ल्ट की तरह सामने आता था? ऐसे में सवाल उठता है क्या 2024 के बाद भाजपा ने अपना सरप्राइज पैकेज बंद कर दिया है? और अब दांव सिर्फ उन्हीं चेहरों पर लगाया जा रहा है जिनका स्ट्राइक रेट कंफर्म है अर्थात साबित है? सबसे बड़ा सवाल—
क्या 2024 जैसी चोट से सबक लेकर बीजेपी अभी से 2029 के लिए अपने चुनावी कप्तान चुन रही है?
आपको बता दे कि भाजपा में सीएम का नाम सुनकर एमएलए भी भौचक्के रह जाते थेे मसलन पर्ची से परफार्मेंस तक लेकिन अब तस्वीर बदली दिख रही है।बिहार में सम्राट चौधरी पर मुहर लगी।बंगाल में शुभेंदु अधिकारी को कमान मिली।असम में हिमंत बिस्वा सरमा की वापसी हुई।यानी अब फॉर्मूला साफ है—सरप्राइज कम, स्ट्राइक रेट ज्यादा।पार्टी अब ऐसे चेहरों को आगे ला रही है जो सिर्फ शपथ नहीं लें…बल्कि सीटें भी दिलाने में कामयाब हो सके ।
2024 का लोकसभा चुनाव बीजेपी के लिए एक बड़ा अलार्म था।“2024 ने दिया रियलिटी चेक भाजपा को। इस चुनाव में भाजपा को63 सीटों का नुकसान हुआ , 2014 के बाद भाजपा अपने दम पर बहुमत से दूर हुई
यानी सिर्फ दिल्ली की चमक से हर राज्य नहीं जीता जा सकता।संदेश साफ था—अगर लोकसभा जीतनी है तो राज्यों में ऐसे चेहरे चाहिए जिनकी पकड़ पोस्टर पर नहीं, ज़मीन पर हो।राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे प्रयोगों ने भी पार्टी को ये समझा दिया कि हर सरप्राइज, सुपरहिट नहीं होता।गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी अक्सर प्रयोग करते हुए दिखाई देती है ऐसे में एक बार फिर भाजपा । अब बीजेपी “Risky Experiment” से निकलकर “Tested Players” पर लौट कर आती हुई दिखाई दे रही है।
ऐसे में बीजेपी का रिकॉर्ड बताता है—जहां फॉर्म कमजोर दिखा, वहां टीम में बदलाव तय है।“2029 की टीम सिलेक्शन”
उत्तराखंड इसका उदाहरण है।अब पार्टी सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं चुन रही…बल्कि 2029 के लिए अपना प्लेइंग इलेवन तैयार कर रही है।क्योंकि 2024 ने सिखा दिया—जैसे हर मैच सिर्फ स्टार बल्लेबाज़ के भरोसे नहीं जीता जाता। मजबूत मिडिल ऑर्डर भी चाहिए।इसलिए बीजेपी में अब पर्ची नहीं खुल रही…अब स्कोरकार्ड देखा जा रहा है।
बिहार से शुरुआत
इसकी शुरुआत भाजपा ने बिहार से की। कहा जाता है 2014 के बाद भाजपा ने सिर्फ़ उत्तर प्रदेश में मजबूत नेतृत्व दिय्या, बाकी मध्यप्रदेश , छतीसगढ़ और राजस्थान में पर्ची का प्रयोग किया। नतीजा सबके सामने है। लेकिन मौजूदा ट्रेंड में बीजेपी ने बदलाव किया। इसकी शुरुआत भाजपा ने महाराष्ट्र से की। महाराष्ट्र में भाजपा नेतृत्व को देवेंन्द फडणवीस जैसे मजबूत नेता को कमान देनी पड़ी। फिर बिहार में भी यह दोहराया गया। बिहार में सम्राट चौधरी को भाजपा ने सीएम बनाया। वही ट्रेंड
असम में भाजपा ने मजबूत संगठनात्मक पकड़ रखने वाले हिमंत बिस्वा सरमा को लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनाया है, जिन्होंने 2026 में 82 सीटों के साथ प्रचंड जीत दर्ज की। वहीं, पश्चिम बंगाल में भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री के रूप में चुना है, जो टीएमसी से भाजपा में आए थे और अब राज्य में भाजपा की कमान संभाल रहे हैं।
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Reported By Mamta Chaturvedi

