ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत दिल्ली से 11 सितंबर को हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम में लीडर्स डिसीजन की बैठक में हिस्सा लिया।
आपको बता दे इस बैठक के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति पुतिन और पेजेशकियां ने वैश्विक व्यापार से लेकर अमेरिकी प्रतिबंध तक के मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा संदेश दिया है
तीनों ही देश के नेताओं ने बैठक पर बड़े आर्थिक सहयोग व्यापार के लिए सुरक्षित रास्ता और स्थानीय करेन्सी के व्यापक इस्तेमाल पर जोर दिया ।वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर के डोमिनेंस को चुनौती देने के लिए ब्रिक्स देशों की कोशिशें और उसे पर अमेरिका की बढ़ती आलोचना के बीच आयी है । इसमें मौजूद ग्लोबल फाइनेंशियल ऑर्डर के दूसरे विकल्पों को मजबूत करने की ब्रिक्स समूह की महत्वाकांक्षाओं का साफ संदेश मिलता है।
आपको बता दे इस बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक व्यापार के लिए सुरक्षित समुद्री रास्तों और सप्लाई रूट के महत्व पर जोड़ दिया पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक व्यापार में प्रगति तभी संभव है जी समुद्री रास्ते सुरक्षित हो सप्लाई रूट खुले हो और सारे नाविक सुरक्षित हो इसलिए भारत फ्रीडम आफ नेवीगेशन यानी की नौवहन की आजादी और नविको की सुरक्षा का प्रबल समर्थक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी ऐसे वक्त पर सामने आई है जब अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष और तनाव की वजह से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ की नाकेबंदी सप्लाई चेन काफी प्रभावित हुई है।
दूसरी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वृक्ष बिजनेस फोरम के लीडर सेशन को संबोधित करते हुए कहा कि इस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक और व्यापक बदलाव हो रहे हैं इसके साथ ही उभरती अर्थव्यवस्थाओं उन पारंपरिक और पुराने आर्थिक टैक्टर की जगह ले रही है जो 20वीं शताब्दी में विकास की कतार में सबसे आगे हुआ करते थे इस दौरान उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि जब मैं पुराना कहता हूं तो यह सिर्फ एक औपचारिकता है हम सभी समझते हैं कि हम किसकी बात कर रहे हैं।
इस दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद ने प्रमुख करेंसीजयों पर निर्भरता को कम करने पर भी काफी जोर दिया ,इसके साथ ही उन्होंने ब्रिक्स समूह के सदस्यों के बीच व्यापार के लिए अपने राष्ट्रीय करेन्सी के ज्यादा इस्तेमाल का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक सदस्य देशों के बीच व्यापार में राष्ट्रीय करेन्सी के इस्तेमाल को बढ़ाना है इसके साथ करेन्सी की जोखिमों को मैनेज करने और रिसिप्रोकल सेटलमेंट के जरिए सिस्टम की स्थापना होनी चाहिए।
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Reported By Mamta Chaturvedi
