कौन थे संत तिरुवल्लुवर जिनकी किताब प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को भेंट की

ब्रिक्स सम्मिट की औपचारिक तौर पर शुरुआत दिल्ली के भारत मंडपम से हो गई मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को मशहूर तमिल रचना तिरुवल्लुवर का रूसी अनुवाद भेद किया आपको बता दे सम्मानित तमिल कवि और दार्शनिक संत तिरुवनलूर द्वारा लिखी गई यह किताब तमिल साहित्य और भारतीय नैतिक विचारों की सबसे जरूरी रचनाओं में से एक है इसका रूसी अनुवाद नायर ने किया था और इसे भारत सरकार के संस्थान सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ क्लासिकल तमिल में प्रकाशित किया था चलिए आपको बताते हैं कि कौन थे तिरुवल्लुवर उनकी रचना को इतना जरूरी क्यों माना जाता है।

संत तिरुवल्लुवर जी ने सम्मानपूर्वक वल्लुवर भी कहा जाता है तमिल संस्कृति और साहित्य में एक सम्मानित स्थान रखते हैं वह कई दार्शनिक थे जिनकी शिक्षा नैतिकता नैतिक आश्रम सामाजिक जीवन और मानवीय रिश्तों पर केंद्रित थी।

जानकारी और इतिहासकारों के बीच उनके सही समय को लेकर कोई आम सहमति नहीं है अलग-अलग परंपराओं और विद्वानों ने उन्हें इतिहास में अलग-अलग समय पर रखा है या मोटे तौर पर चौथी सदी ईसा पूर्व से पांचवी सदी ईस्वी तक फैला है तिरुवनलूर के दर्शन की सबसे खास विशेषताओं में से एक इसका सार्वभौमिक स्वरूप है उनकी शिक्षाएं की शिकार जाति धर्म या फिर संप्रदाय तक सीमित नहीं है इसके बजाय तिरुकुलर नैतिक जीवन के ऐसे सिद्धांत पेश करता है जो पूरी मानवता पर लागू होता है

तिरुक्कुलर क्या है

थिरुक्कुरल को तमिल साहित्य की सबसे बड़ी उपलब्धियां में से एक माना जाता है। गहरी नैतिक और दार्शनिक शिक्षा की वजह से इसे अक्सर तमिल वेद या फिर पांचवा वेद भी कहा जाता है।  इसकी रचना में 1330 दोहे हैं और हर दोहों को कुराली कहा जाता है। छोटे होने के बावजूद यह छन्द मानव जीवन और समाज से जुड़े कई तरह के विषयों पर बात करते हैं या किताब तीन मुख्य हिस्सों में बैठी हुई है जिसमें नैतिकता सांसारिक मामले और प्रेम के बारे में बताया गया है।

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Reported By Mamta Chaturvedi