Guru Purnima: गुरु पूर्णिमा पर डॉ. रामफल शास्त्री ने किया ब्राह्मणों एवं विद्वानों का सम्मान, भारतीय संस्कृति के संरक्षण का दिया संदेश

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Guru Purnima: विधिवत पूजन-अर्चन, ब्राह्मण भोज, वस्त्र-दक्षिणा एवं उपहार भेंट कर किया सम्मान; जिला शिक्षा अधिकारी सहित संस्कृत अध्यापक और विद्वान रहे उपस्थित

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दिल्ली , 29 जुलाई- गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर डॉ. रामफल शास्त्री एवं उनकी धर्मपत्नी सविता ने अपने आवास सेक्टर- 4 रेवाड़ी पर ब्राह्मणों एवं विद्वानों के सम्मान में एक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर भारतीय गुरु परंपरा और सनातन मूल्यों के प्रति श्रद्धा एवं समर्पण का भाव देखने को मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजन-अर्चन से हुई। इसके बाद ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक भोजन कराया गया और सम्मान समारोह आयोजित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले ब्राह्मणों एवं विद्वानों ने डॉ. रामफल शास्त्री और श्रीमती सविता को मंगलकामनाएं एवं आशीर्वचन प्रदान किए।

आयोजन में जिला शिक्षा अधिकारी श्री राजेंद्र शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनकी अध्यक्षता में संस्कृत अध्यापकगण, विद्वानजन एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की। उपस्थित सभी लोगों ने डॉ. रामफल शास्त्री एवं श्रीमती सविता को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए उनके इस सांस्कृतिक एवं धार्मिक प्रयास की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है और ऐसी परंपराएं समाज में संस्कार, ज्ञान और नैतिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन भारतीय संस्कृति, गुरु परंपरा एवं सनातन मूल्यों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया। उपस्थित श्रद्धालुओं एवं विद्वानों ने इसे अत्यंत प्रेरणादायक, संस्कारवर्धक एवं समाज के लिए अनुकरणीय पहल बताया।

इस अवसर पर राजेंद्र शर्मा (जिला शिक्षा अधिकारी, रेवाड़ी), सुरेंद्र शर्मा गुरुजी, राजेंद्र प्रसाद (सेवानिवृत्त बीएसएनएल अधिकारी), वेद प्रकाश शास्त्री, नेमीचंद सानंडिल्य (हेडमास्टर), मोतीराम शास्त्री, शिव कुमार शास्त्री, विक्रम सिंह शास्त्री, पहलवान भूपेंद्र सिंह शास्त्री, आचार्य रविकांत, पवन शास्त्री, अनिल शास्त्री (सेवानिवृत्त प्राचार्य), रामकिशन (सेवानिवृत्त मुख्य अध्यापक), भीमसेन शास्त्री, महेश कुमार शास्त्री, खुशीराम शर्मा, दिनेश जांगड़ा, प्रणय शर्मा, मालती देवी, कुमारी स्वाति शर्मा, कुमारी कीर्ति शर्मा, कुमारी तनु शर्मा एवं कुमारी रिया शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु एवं विद्वान उपस्थित रहे।

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