New Delhi 5th Meeting of Live Events Development Cell: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने आज कहा कि भारत के लाइव इवेंट्स क्षेत्र में पिछले एक वर्ष में 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, देश भर में लगभग 34,000 कार्यक्रम आयोजित किए गए और अब यह क्षेत्र एक करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका को समर्थन दे रहा है।
5th Meeting of Live Events Development Cell
लाइव इवेंट्स डेवलपमेंट सेल (एलईडीसी) की 5वीं बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने 2030 तक इस क्षेत्र को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें 1.5-2 करोड़ प्रत्यक्ष और संबद्ध रोजगार सृजित होने की संभावना है। उन्होंने एलईडीसी को “उद्योग, राज्यों और केंद्र के बीच सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण” बताया।
चंचल सरकार ने रेखांकित किया कि एलईडीसी में 14 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों, 10 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों तथा 21 उद्योग निकायों को एक साथ लाया गया हैं। इसने मॉडल कार्यकारी आदेश, इंडिया सिने हब पर सिंगल विंडो पोर्टल, सुव्यवस्थित मंजूरी प्रक्रियाओं और कौशल विकास पहलों सहित प्रमुख सुधारों को आगे बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि नामित नोडल अधिकारियों वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या 16 से बढ़कर 29 हो गई है।
बैठक में इंडिया सिने हब (आईसीएच) पोर्टल पर लाइव इवेंट उद्योग के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस पोर्टल के कार्यान्वयन की समीक्षा की गई। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से नोडल अधिकारियों को नामित करने, विभागों से अधिकृत अधिकारियों को नामांकित करने, विभागीय और स्थानीय लाइसेंसिंग प्रणालियों को आईसीएच पोर्टल के साथ एकीकृत करने तथा लाइसेंस की पूरी प्रक्रिया को पोर्टल के माध्यम से संचालित करने के लिए कहा गया। इसके अलावा लाइव इवेंट स्थलों को पोर्टल पर शामिल करने और लाइव इवेंट के लिए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को समयबद्ध सार्वजनिक सेवा के रूप में अधिसूचित करने का भी आग्रह किया गया।
इसके अलावा, यह भी बताया गया कि अब तक पांच राज्यों ने “भारत में लाइव इवेंट्स के लिए लाइसेंस और अनुमतियों को सुव्यवस्थित करने संबंधी मॉडल कार्यकारी आदेश, 2026” को अपनाया है। यहा आदेश 13 मार्च 2026 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा किया गया था। एलईडीडीसी के सदस्य राज्य महाराष्ट्र राज्य में एमईओ को अपनाया है और इसके कार्यान्वयन पर एक प्रस्तुति दी है। शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इसे शीघ्र अपनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया गया। यह भी बताया गया कि गृह मंत्रालय ने विदेशी कलाकारों द्वारा अल्पकालिक प्रवास के लिए एफआरआरओ में पुन: पंजीकरण संबंधी आवश्यकताओं को सुव्यवस्थित किया है।
केंद्रीय मंत्रालयों से क्षेत्र-विशिष्ट सुविधाएं प्रदान करने संबंधी कार्यों को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया गया। इनमें संबंधित मंत्रालयों द्वारा कलाकारों और क्रू के लिए समूह वीजा की व्यवस्था तथा शो के उपकरणों के लिए सीमा शुल्क में छूट; कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा लाइव मनोरंजन कौशल को राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचें (एनएसक्यूएफ) में शामिल करना, प्रशिक्षण एवं प्रमाणन केंद्र तथा अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम; पर्यटन मंत्रालय द्वारा भारत को कार्यक्रम-आधारित पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में बढ़ावा देना; तथा संबंधित मंत्रालयों द्वारा जीएसटी के युक्तिकरण और सीएसआर के अनुरूप प्रोत्साहन सहित वित्तीय प्रोत्साहन, वीजीएफ और मिश्रित वित्तपोषण के माध्यम से अवसंरचना के वित्तपोषण तथा लाइव मनोरंजन क्षेत्र को एमएसएमई के अंतर्गत मान्यता प्रदान करना शामिल है।
इसके अलावा, एलईडीसी ने अगली पीढ़ी के सुधारों पर विचार-विमर्श किया। इनमें अनेक अधिकार समितियों द्वारा की जाने वाली परस्पर ओवरलैपिंग मांगों के स्थान पर अधिसूचित शुल्क वाली एकल राष्ट्रीय संगीत लाइसेंस व्यवस्था, ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत अधिसूचित मनोरंजन क्षेत्र तथा अंतरराष्ट्रीय कलाकारों को किए जाने वाले भुगतान के लिए विदेशी धन-प्रेषण पर निर्धारित सीमा में ढील देने के प्रस्ताव शामिल हैं।
पूर्व-अनुमोदित स्थलों के संबंध में बताया गया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) ने अपनी परिसंपत्तियों/स्थलों पर लाइव इवेंट्स आयोजित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) जारी की है। प्रमुख स्थलों को पहले से अनुमोदित किया जाना है, ताकि आयोजकों को प्रत्येक कार्यक्रम के लिए उसी स्थल के स्तर पर बार-बार उन्ही अनुमतियों के लिए आवेदन ना करना पड़े।
एलईडीसी ने उद्देश्य-विशिष्ट स्थलों की कमी को दूर करने के लिए “ब्राउनफील्ड और ग्रीनफील्ड स्थल विकास” संबंधी ढांचे की भी समीक्षा की। राज्य सरकारों, उद्योग जगत के हितधारकों और खेल प्राधिकरणों से मसौदा ढांचे पर अपनी औपचारिक प्रतिक्रिया देने का अनुरोध किया गया। विचार किए गए प्रस्तावों में राज्यों द्वारा उद्देश्य-विशिष्ट स्थलों की पहचान और विकास, एक निश्चित क्षमता से अधिक क्षमता वाले लाइव इवेंट और प्रदर्शन स्थलों को अवसंरचना उप-क्षेत्रों की सामंजस्यपूर्ण मास्टर सूची में शामिल करना तथा व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण योजना के माध्यम से परियोजनाओं को सहायता प्रदान करना शामिल है।
लाइव इवेंट कौशल विकास समिति, जिसकी अध्यक्षता भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के कुलपति ने की, ने कौशल विकास पाठ्यक्रम से संबंधित प्रगति प्रस्तुत की। इसमें आईआईएमसी, एमईएससी और ईईएमए के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) तथा लाइव इवेंट्स से संबंधित प्रमाण-पत्र और अल्पावधि पाठ्यक्रम शामिल हैं। हितधारकों को अपने कौशल विकास संस्थानों के माध्यम से इन मॉड्यूलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह भी प्रस्तावित किया गया है कि लाइव इवेंट्स और संगीत समारोहों में महिलाओं और दिव्यांगजनों की सुरक्षा के लिए समावेशीता संबंधी दिशानिर्देश और ग्रीन कॉन्सर्ट प्रोटोकॉल उद्योग के सहयोग से वेव्ज़ (डब्ल्यूएवीईएस) 2027 में शुरू किए जाएं।
बैठक के समापन पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भारत के लाइव इवेंट्स क्षेत्र के लिए सहायक और विकासोन्मुखी इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
Reported By Mamta Chaturvedi

