वरिष्ठ नागरिकों के लिए जन-जागरूकता एवं स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता सुदृढ़ करने का लोक सभा अध्यक्ष ने किया आह्वान

अनुसंधान, नवाचार एवं विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं से हड्डियों और रीढ़ संबंधी विकारों के उपचार में हो सकता है सुधार: लोक सभा अध्यक्ष

लोक सभा अध्यक्ष ने नई दिल्ली में 13वें अंतर्राष्ट्रीय GOSICON सम्मेलन को संबोधित किया

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर, 2026: लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने आज समाज के सभी वर्गों तक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि चुनौती केवल उन्नत उपचार सुविधाओं का विकास करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि इन सुविधाओं का लाभ उन लोगों तक पहुँचे, जिन्हें इसकी सर्वाधिक आवश्यकता है; जिनमें स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित समुदायों के वरिष्ठ नागरिक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक को आयु की परवाह किए बिना गरिमापूर्ण जीवन जीने, गतिशील बने रहने और बेहतर जीवन-स्तर प्राप्त करने का अवसर मिलना चाहिए। श्री बिरला नई दिल्ली में जेरियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सोसाइटी ऑफ इंडिया (GOSI) द्वारा आयोजित वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ’13वें GOSICON’ में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को संबोधित कर रहे थे।

श्री बिरला ने वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल में परिवार, समाज, स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों और सार्वजनिक संस्थाओं की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि व्यापक जनसंपर्क, चिकित्सा संबंधी ज्ञान का प्रभावी प्रसार तथा सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग हड्डियों के स्वास्थ्य, चोटों की रोकथाम और उपलब्ध उपचार विकल्पों के संबंध में जागरूकता बढ़ाने में सहायक हो सकता है। अनुसंधान के निष्कर्षों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का प्रसार इस प्रकार किया जाना चाहिए, जिससे आम जनता अपने स्वास्थ्य के संबंध में सूचित निर्णय ले सके। उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंताओं और सुझावों का व्यापक सामाजिक महत्व है तथा नीति-निर्माण के दौरान उन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हेतु सरकार के निरंतर प्रयासों और उपयुक्त नीतियों के महत्व पर भी उन्होंने बल दिया।

निवारक स्वास्थ्य देखभाल और सक्रिय जीवनशैली के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री बिरला ने कहा कि बढ़ती आयु एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन नियमित व्यायाम, समय पर चिकित्सा परामर्श और उचित स्वास्थ्य संबंधी उपायों के माध्यम से वृद्धावस्था में भी अच्छा स्वास्थ्य, गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता बनाए रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि हड्डियों से संबंधित रोग, घुटनों की समस्याएँ, रीढ़ संबंधी विकार और कूल्हे की चोटें वरिष्ठ नागरिकों के समक्ष गंभीर चुनौतियाँ प्रस्तुत करती हैं तथा उनकी स्वतंत्रता और गतिशीलता को प्रभावित कर सकती हैं। नियमित व्यायाम को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह हड्डियों के स्वास्थ्य और शारीरिक सुदृढ़ता को बनाए रखने का एक व्यावहारिक माध्यम है। स्वास्थ्य सेवाओं में रोग होने के बाद उपचार पर निर्भर रहने के बजाय रोगों की रोकथाम को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। श्री बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि बढ़ती आयु के साथ स्वस्थ जीवन जीने के लिए निवारक उपायों और स्वस्थ जीवनशैली के संबंध में व्यापक जन-जागरूकता आवश्यक है।

चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में प्रगति से हड्डियों और रीढ़ संबंधी विकारों के उपचार के नए मार्ग प्रशस्त हो रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और सुलभता में सुधार के लिए चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों को नई तकनीकों का अध्ययन करने, अपने व्यावसायिक अनुभव साझा करने तथा सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान निरंतर जारी रखना चाहिए।

हड्डियों और रीढ़ की चोटों के उपचार को आगे बढ़ाने में चिकित्सा पेशेवरों के महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने वरिष्ठ नागरिकों की गतिशीलता और स्वतंत्र रूप से दैनिक कार्य करने की क्षमता बहाल करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रभावी उपचार एवं पुनर्वास के साथ उन्नत चिकित्सा प्रौद्योगिकियों को अपनाने से हड्डियों, रीढ़ और कूल्हे की गंभीर चोटों से पीड़ित रोगियों के उपचार परिणामों में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।

श्री बिरला ने विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर अनुसंधान, तकनीकी प्रगति और चिकित्सकीय अनुभवों के आदान-प्रदान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञों के सम्मेलन ज्ञान के आदान-प्रदान, उभरती चुनौतियों पर चर्चा, अनुसंधान निष्कर्षों को साझा करने तथा चिकित्सकों की अगली पीढ़ी को

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