BJP Ravidas Yatra: रविदास यात्रा से दलितों के वोट साधेगी भाजपा

BJP Ravidas Yatra: माघ पूर्णिमा 20 फरवरी को वाराणसी में होगा यात्रा का समापन

BJP Ravidas Yatra

उत्तर प्रदेश,पंजाब और उत्तराखंड के दलित वोट को साधने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने संत रविदास यात्रा देश के 8 राज्यों से निकालने का फैसला किया था जिसका चौथा चरण भी अब जल्दी शुरू होगा।


संत रविदास की जयंती 29 जुलाई गुरु पूर्णिमा के दिन भाजपा ने रविदास यात्रा वाराणसी से शुरू की थी जो अभी तक उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड,हरियाणा,दिल्ली,मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से गुजर चुकी है। इस यात्रा की खासियत यह है कि संत रविदास यात्रा को सिर्फ दलितों ने ही नहीं सभी समाज के लोगों के शामिल होने से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।
संत रविदास यात्रा के कुल 5 चरण होंगे इनमें से पहला चरण कलश वंदन अभियान का 29 जुलाई से 31 अगस्त तक पूरा हो चुका हैं जिसको अद्भुत रिस्पांस मिला है।


दूसरा चरण था संत संपर्क अभियान का जिसके तहत भाजपा ने देश के 80 हजार साधु संतों और मठों को इस यात्रा से जोड़ा है।


तीसरा चरण समरसता यात्रा का है जो 5 अक्टूबर से 5 नवंबर तक होना है इसकी शुरुआत पंजाब के जालंधर से होगी इस यात्रा को सीधे सीधे पंजाब के चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है


चौथा चरण छात्रावास संपर्क अभियान का होगा जो 26 नवंबर से 15 जनवरी तक चलेगा इस चौथे चरण की योजना बनाने के लिए इस यात्रा के संयोजक भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लालसिंह आर्य ने 9 अक्टूबर को दिल्ली में बैठक बुलाई है।


पांचवां और अंतिम चरण यात्रा का 20 फरवरी तक चलेगा इस दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे और यात्रा का समापन 20 फरवरी को वाराणसी में होगा
संभावना इस बात की है कि वाराणसी में इस यात्रा के समापन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मौजूद रहेंगे वैसे भी वाराणसी इनका संसदीय क्षेत्र भी है।


संत रविदास यात्रा का उद्देश्य दलितों को भाजपा से जोड़ना था। पंजाब में 33 प्रतिशत दलित है जो देश में सबसे ज्यादा है उत्तर प्रदेश में 22 प्रतिशत दलित वोट है जो ज्यादातर मायावती की बसपा को मिलते रहे है।


भाजपा की निगाहें इसी दलित वोट पर लगी हुई है
बसपा को उत्तर प्रदेश में बुरी से बुरी स्थिति में भी 12 से 14 फीसदी दलित वोट मिलते रहे है।


सूत्रों का कहना है कि संत रविदास यात्रा की योजना पंजाब के दलितों को ध्यान में रखकर भाजपा ने बनाई थी बाद में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को भी इस यात्रा में शामिल किया गया था।